मेरा एक दर्द

Posted : November 15, 2009 at 6:53 pm [IST]

रोज सबेरे
निश्चित पथ के
प्रात भ्रमण में
एक दृश्य
अनभावन आता.
हरश्रृंगार के
दुर्बल बृक्षों
से फूलों का झर झर गिरना.
और राह के पास
धूल से सनते रहना.
फिर महरी के झाडू द्वारा घोर निरादर
और अंत तो और भयानक
पत्तों के अम्बर में फिंकना
और वही फिर धू धू जलना
हर जीवन का अंत यही है
पर फिर भी मन क्यों
घबडाता.

- Indra

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