एक उदाश शाम की श्रद्धांजलि

Posted : August 1, 2010 at 9:14 pm [IST]

मन उदाश है
भरा भरा |
फिर से मन में एक
प्रश्न उभर आया है|
‘जीवन क्या है?’
कल तक दोनों
साथ साथ थे
साठ साल से|
आज फ्रेम में
बंद एक है,
और एक सोफे पर बैठे
याद लिए बर्षों का मन में |
लिए अश्रू बिन्दु आँखों में
और छुपाने का प्रयास भी|
क्या कहता मैं
सांत्वना के कुछ शब्द खोखलें
बंधू ! यही जीवन है
आज तुम्हारे साथ हुआ जो
कल शायद अपनी बारी हो|
नहीं समझ पाते हैं हम
कितनी बातों को
ब्यर्थ दुखाते और अपने भी दुःख पाते हैं |
मन उदाश है |

नोट: एक दोस्त की पत्नी के न रहने पर |

- Indra

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