परम पिता से एक शिकायत
Posted : October 25, 2009 at 5:50 pm [IST]
हे परम पिता !
जीवन की आपाधापी में
दुःख सुख चाहे जो हम पायें
सह लेंगे सब तेरे बल पर.
मन श्रांत ब्यथित होकर
पर जब
सो जाये करे बिश्राम जरा
तुम सपनों से ना तंग करो
और दुखित हमे कुछ और करो.
सपने गर नहीं रोक सकते
तो कम से कम
तुम उनको मीठे हीं कर दो
जीने का तुम कुछ रस दे दो
सपनों का दुःख तो तुम हर लो.
सपनों में सब चाहत दे दो
कुछ क्षण हम को जी लेने दो .
गर व्यवसायिक हो बात करें
कुछ भी तो नहीं नुकशान तुम्हें.
इसलिए इसे स्वीकार करो
न मेरी नींद ख़राब करो,
- Indra
Category: Tidbits |
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