अच्छी कहानियों का अकाल

Posted : May 24, 2009 at 1:09 pm [IST]

आजकल दो सीरियल NDTV Imgine पर चल रहा है- एक शनिवार महात्म्य पर है दूसरा रामायण की कथा पर. राम की जो कहानी दिखाई जा रही है वह कहाँ से ली गयी है पता नहीं; उसकी कोई जरूरत नहीं है. एक तरफ हम समाज की कुरीतियों को हटाना चाहते हें, दूसरी तरफ शनि महिमा को बखानते हें. राम हनुमान से युद्ध करते हें एक कहानी गढ़ के. यह हाल है श्री प्रन्नोय राय के चैनल का. श्री राय जाने माने समझदार बुद्धिजीवी, अब व्यवसायिक हैं. दर्जनों चैनल पर सैकंडों इसी तरह के बिना सर पैर की कहानियां दिखाई जा रही है. सभी चरित्र बहुत बार ब्याह करतें हैं, मरते और जी जाते हैं. क्या असर होता होगा लोगों के अपरिपक्कव दिमाग पर?

कभी कभी सोचता हूँ क्यों बनाते हैं लोग टी . वी. के ऐसे सीरियल . क्यों हर प्रोड्यूसर अपनी अपनी कहानी खुद लिखते हैं. जब देश में हजारों कहानीकार अच्छी अच्छी कहानियां हर साल लिखते हैं. उनमें बहुत सी काफी प्रन्संसित होती हैं. क्यों नहीं सीरियल उन्हीं कहानियों पर बनाये जाते हैं? उन्हें कौन कहे और कैसे. अगर अच्छी कहानी के लेखको को चुनते और उन्हें मिहताना देते तो अच्छे कथाकार को बढावा मिलता और अच्छे साहित्य की रचना को प्रोत्साहन मिलता. क्या ऐसा होगा?
यह तो हमें ही करना होगा सरकार का बहाना तो नहीं चलेगा.

- Indra

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