जीवन- सुबह और शाम का आनंद
Posted : May 31, 2009 at 9:37 am [IST]
मेरे एक प्रिय दोस्त हैं. बंगलुरु में रहते हैं. दोस्ती पुरानी है. Kharagpur फिर हिंदुस्तान मोटर्स में साथ रहे. काफी इधर उधर भी साथ गए. हर कुछ दिनों पर उनका मेल ब्लॉग मिलता है. इस बार चार फोटो हैं जिन्दगी के चार अवस्थाओं को बताते हुए. सबेरे का सूरज है और शाम का भी. मुझे तो दोनों ही अच्छे लगते हैं. शायद सबको लगते होंगे. पर शाम सुबह का सूरज नहीं देख सकता. हम आदमी को तो अपने सुबह की कुछ प्यारी बातें अच्छी तरह याद रहती है. हम भाग्यशाली हैं. पर हम अपने शाम से डरने क्यों लगते हैं? यह लाचारी क्यों?
कुछ दिनों पहले दांत में दर्द होने लगा तो डॉक्टर के पास गए. प्रश्न आया क्या दांत निकाल दिए जाएँ. मैंने कहा- कोई दिक्कत नहीं. निकाल दीजिये, अगर कोई और रास्ता नहीं. अगर दर्द नहीं होता अगर दांत गिर जाता तो अच्छा होता. मैं कृत्रिम दांत नहीं लगवाऊंगा. खाने को तरल कर दूंगा. आँख से दीखना कम हो गया है. कान भी सुनना कम कर देंगे. मुझे तो उसी के साथ जीना सिखाना होगा. हर चीज में कुछ आनंद है, क्यों न उसका पूरामजा ले, बाकी को भूल जाया जाये.
उम्र के साथ हाथ मिला कर चलने में मजा आता है. उससे लड़ने का अब साहस नहीं .पर हर अवस्था में मस्त रहना तो व्यक्ति के हाथ में है. क्यों दूसरे की सोचे, वह भी तो व्यस्त है
- Indra
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