खोपड़ी पर अनाचार

Posted : June 21, 2009 at 2:55 am [IST]

मेरी खोपड़ी पर कुछ
घाव हैं पुराने.
हर बार जब समय उन्हें
भर देता है
मेरे तीखे नाखून
उन्हें खुरेद देते हैं गहरे पैठ.
और दर्द बढ़ जाता है
सहने की सीमा से आगे.
मन चाहता है
कोई मेरी खोपड़ी सहला दे,
पर आजकल कहाँ मिलता है कोई.
फिर मन कड़ा कर
कुरेदना बंद कर देता हूँ
दर्द धीरे धीरे
कम हो जाता है
सामान्य चलने लगाती है जिंदगी.
पर पता नहीं क्यों और कब
किस मानशिक तनाव के कारन
फिर नाखून उन घावों को
खुरेदने लगते हैं
पहले कुछ आनंद मिलता है
उन घावों की सुखी की पपड़ियों को
देख संतोष होता है
पर नाखून गहरे जाने लगते हैं
घाव हरे हो जाते हैं
दर्द बढ़ जाता है.
यह बार बार होता है
न मैं बदल सकता
न दर्द
न जीने की तमन्ना.
फिर एक दार्शनिक प्रश्न
कहीं कुलबुलाता है.
घाव और दर्द क्या
जीवन के अभिन्न
अंग हैं?

- Indra

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