सत्तरवां साल
Posted : August 14, 2009 at 2:42 pm [IST]
सत्तर बसंतों से
कुसुमित यह जीवन.
मदभरा सुगंध लिए
सतरंगीं संग मिले
कोयल की कूक लिए
गीत लिए प्रीत लिए
रोज नए नृत्य लिए
जीवन संगीत लिए
चांदी के दिन और
सोने की लिए रात लिए
तारों की टिमटिम में
चांदनी की प्यास लिए
सत्तर बसंतों को
पार किया जीवन.
सूरज का ताप लिए
जीवन संघर्ष किये
जीतने की प्यास लिए
शत शत प्रयास किये
सत्तर आतप का
तपा हुआ जीवन..
जीत की उमंग लिए
जीवन तरंग बने
तट तक पहुँचने में
थका हारा जीवन.
सत्तर शीतलहरी को
झेल चूका जीवन.
हर्ष औ उल्लास लिए
सिंदूरी शाम लिए
और अंधेरी रात लिए
सत्तर बरसातों में
भींग चूका जीवन.
अंत कंहाँ, शाम है यह
कल के आयाम को
खोजता यह जीवन.
- Indra
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1 Comment »
Sandip Mehta made a comment about your note “सत्तरवां साल”:
Jeewan abnaye lakshya ki or badh raha hai. Nai asha naye utsah se nayee peedhiyon ko marg darshan kar raha hai aur kar sakata hai.
Posted by: Indra at August 16, 2009 @ 10:48 am
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