सागर तट पर
Posted : December 20, 2009 at 8:34 pm [IST]
अच्छा लगता है सागर तट
और अनंत जलराशि
दृष्टिसुख देती उसकी.
दूर श्वेत फेनिल लहरों का
जल हंसों का भान कराना
लहरों का तट से टकराना
मिट कर फिर फिर से आ जाना.
और किनारे के पेड़ों से आते जाते
वायु का संगीत सुनाना
और उभरती चाह नयी फिर
आकर यहीं कहीं बस जाना.
फिर नजरें जा दूर ठहरती
मन में फिर एक बंसी बजती
उत्तर लेकर प्रश्न उभरता
क्या सागर परमात्म रूप है?
सब जलधाराएँ हैं आ मिलती
फिर भी सागर जल क्यों खारा?
और यही खारा जल फिर जा
कंहीं दूर फिर बादल बनता
जग हित वह अमृत बरसाता
और खड़े सागर तट पर मैं
एक बार फिर हूँ मुस्काता
- Indra
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