एक बेवजह उदाशी

Posted : January 24, 2010 at 10:51 am [IST]

मन उदाश उदाश सा है
पर एक आश पास सा है
मन भूला लेता हूँ
कल की मधुर यादों में
उस हँसी का कँहा मुकाबला
जो मैंने देखी तेरे ओठों पे
और फिर तुम्हारा
नट खटी अंदाज
क्या कहूं उसकी बात
फिर उन्हीं अपने प्यारे सपनों में
मन बहल जाता है
और एक आश का बिश्वास भी है

- Indra

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