आखिरी बिश्राम
Posted : July 5, 2010 at 5:25 am [IST]
आओ ठहरो जरा
कुछ समय
और
आराम करें |
नहीं अब राह बहुत
कुछ पुरानी बात करें |
डगर लम्बी और अनजानी थी
न कहीं छांह न सराय
हमने पाई थी|
मिला जो साथ
वे भी सभी बेमानी थी |
फिर भी अरे
देखें जो हमने
सपने थे
हुए तो सत्य
किसकी वह मिहरबानी थी|
आओ कुछ हसीनपल जी लें
कुछ सुनाओ तुम,
फिर सुनाऊँ मैं भी
दिन थे खुशनुमा और रातें
जो दीवानी थीं |
कौन जाने कहाँ कब
साँस टूटे, साथ छूटे
जरा बैठो और आखिरी बात करें |
- Indra
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